- प्राचीन भारत - विकिपीडिया
ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ग॓गा और यमुना नदी का उल्लेख केवल एक बार हुआ है। इस काल में कौसाम्बी नगर मे॓ पहली बार पक्की ईटो का प्रयोग किया गया। इस काल में वर्ण व्यासाय के बजाय जन्म के आधार पे निर्धारित होने लगे।
- प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी - विकिपीडिया
प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक को जानने के लिये प्राचीन साहित्य और पुरातत्व का सहारा लेना पड़ता है। प्राचीन भारत का साहित्य अत्यन्त विपुल एवं विविधता सम्पन्न है। इसमें धर्म, दर्शन, भाषा, शिक्षा आदि के अतिरिक्त गणित, ज्योतिष, सैन्य विज्ञान, आयुर्वेद, रसायन, धातुकर्म, आदि भी वर्ण्यविषय रहे हैं। [1]
- प्राचीन कालीन वस्तु - हिन्दी परिभाषा, व्याकरण, उच्चारण, पर्यायवाची और . . .
'प्राचीन कालीन वस्तु' की परिभाषा जानें। उच्चारण, पर्यायवाची और व्याकरण पता करें। विशाल हिन्दी संग्रह में 'प्राचीन कालीन वस्तु' के
- प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत | Sources of Indian History in Hindi
"प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत" में लिखित, मौखिक, पुरातात्विक, और कला के माध्यम से प्राचीन भारत की घटनाओं और सभ्यता का अध्ययन किया
- प्राचीन भारतीय इतिहास के पुरातात्विक स्रोत Archaeological Sources of . . .
पुरातत्व शब्द ‘पुरा’ (प्राचीन) और ‘तत्त्व’ (वस्तु या तत्व) से मिलकर बना है। अतः पुरातत्त्व का तात्पर्य प्राचीन वस्तुओं के अध्ययन से है।
- भारतीय विरासत और संस्कृति: कला, वास्तुकला और परंपराएँ
यह लेख यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में मदद करता है क्योंकि इसमें भारतीय विरासत और संस्कृति, इसके अर्थ, प्रकार, राष्ट्रीय विकास में भूमिका और इसकी चुनौतियों के बारे में बात की गई है। इसमें प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है।
- प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की अवधारणा Concept of Ancient . . .
परिचय भारतवर्ष प्राचीन काल से ही ज्ञान-विज्ञान, कला, संस्कृति और सभ्यता का अग्रणी केंद्र रहा है।
- प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी - Wikiwand
प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक को जानने के लिये प्राचीन साहित्य और पुरातत्व का सहारा लेना पड़ता है। प्राचीन भारत का साहित्य अत्यन्त विपुल एवं विविधता सम्पन्न है। इसमें धर्म, दर्शन, भाषा, शिक्षा आदि के अतिरिक्त गणित, ज्योतिष, सैन्य विज्ञान, आयुर्वेद, रसायन, धातुकर्म, आदि भी वर्ण्यविषय रहे हैं। [1]
|